तिब्बती गैज़ल, जिसे गोआ प्रोकाप्रा पिक्टीकाउडाटा (Goa – Procapra picticaudata) के नाम से भी जाना जाता है, एंटीलोपिना उप-परिवार (Antilopinae Sub-family) की एक प्रमुख प्रजाति है। यह मृग प्रजाति मुख्य रूप से तिब्बत के ऊँचे पठारी क्षेत्रों में पाई जाती है जहाँ इसका प्राकृतिक आवास समुद्र तल से लगभग 4000 से 5500 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है। वैज्ञानिक नाम Procapra picticaudata वाली यह प्रजाति अपनी शांत प्रकृति, दुर्गम आवास और अनूठी अनुकूलन क्षमताओं के कारण जीव विज्ञानियों तथा वन्यजीव संरक्षकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
भारत में तिब्बती गैज़ल की आबादी सीमित है। इसकी छोटी संख्या दक्षिणी एवं दक्षिण-पूर्वी लद्दाख के भारतीय चांगथांग क्षेत्र में तथा उत्तरी सिक्किम के गुरुडोंगमार–त्सो ल्हामो पठार में पाई जाती है। ऊँचाई वाले इन ठंडे, शुष्क क्षेत्रों में यह प्रजाति विशेष रूप से अनुकूलित है।
संरक्षण की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण है कि तिब्बती गैज़ल को आईयूसीएन (IUCN) की लाल सूची में निकट संकट (Near Threatened) श्रेणी में रखा गया है, जो इसके आवास संरक्षण तथा संख्या बनाए रखने की आवश्यकता को दर्शाता है।
शारीरिक विशेषताएँ
- तिब्बती गैज़ल का शरीर हल्का और तेज दौड़ने के अनुकूल होता है।
- नर में छोटे परंतु नुकीले सींग होते हैं।
- शरीर हल्के भूरे रंग का और नीचे की ओर सफेद होता है।
- आँखें बड़ी और सतर्क, जिससे यह दूर से ही शिकारियों की गतिविधि भाँप लेती है।
- इसकी शारीरिक बनावट इसे ऊँचाई वाले ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में तेज गति से दौड़ने में सक्षम बनाती है।
व्यवहार और जीवनशैली
यह प्रजाति सामान्यतः छोटे समूहों में रहती है।
अत्यंत शर्मीली होने के कारण मनुष्यों के संपर्क से दूर रहती है।
मुख्यतः ठंड सहने वाली घास, छोटे पौधे और झाड़ियों पर निर्भर रहती है।
