मकरविलक्कू (Makaravilakku) केरल के सबरीमाला मंदिर में मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाला एक प्रमुख वार्षिक उत्सव है। इस पर्व की सबसे विशेष परंपरा वह ‘प्रकाश’ है जिसे स्थानीय भाषा में मकरविलक्कू कहा जाता है। यह प्रकाश सबरीमाला मंदिर के समीप स्थित पोनम्बलमेडु नामक पठारी क्षेत्र में प्रज्वलित किया जाता है।
यह पर्व प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होता है और भगवान अयप्पा के भक्तों के लिए अत्यधिक महत्व रखता है। लाखों श्रद्धालु इस दिन सबरीमाला पहुंचकर दिव्य ‘मकरविलक्कू’ के दर्शन करते हैं जिसे आस्था का अद्भुत प्रतीक माना जाता है।
पंबा मंदिर, जो सबरीमाला का बेस स्टेशन है, उसके मुख्य पुजारी आकाश में व्याध तारा (Sirius Star) के दर्शन होने के बाद इस प्रकाश को तीन बार दिखाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह प्रकाश ब्रह्मांडीय उत्पत्ति का प्रतीक माना जाता है।
ऐतिहासिक रूप से यह अनुष्ठान मलाया अरया आदिवासी समुदाय द्वारा संपन्न किया जाता था। किंतु 1950 के दशक में जब त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड ने सबरीमाला मंदिर का प्रशासन अपने हाथ में लिया, तब इस समुदाय से यह अधिकार छिन गया।
ध्यान देने योग्य है कि मकर संक्रांति के दिन जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, तब आकाश में एक तारा प्रकट होता है जिसे मकर ज्योति (Makara Jyothi) कहा जाता है। इसे भी इस पर्व से गहराई से जुड़ी एक पवित्र घटना माना जाता है।
मकरविलक्कू का अर्थ और महत्व
‘मकरविलक्कू’ शब्द दो भागों से मिलकर बना है:
- मकर : मकर राशि या मकर संक्रांति से संबंधित
- विलक्कू : दीप या प्रकाश
अर्थात, यह वह पवित्र प्रकाश है जिसे मकर संक्रांति के दिन विशेष अनुष्ठानों के साथ प्रज्वलित किया जाता है। भक्त इस प्रकाश को भगवान अयप्पा के दिव्य संकेत के रूप में स्वीकार करते हैं।
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