भारत की सबसे ऊँची चोटी कंचनजंगा है जिसकी ऊंचाई 8,586 मीटर (28,169 फीट) है। यह पर्वत सिक्किम (भारत) और नेपाल की सीमा पर पूर्वी हिमालय क्षेत्र में स्थित है। कंचनजंगा दुनिया की तीसरी सबसे ऊँची चोटी भी है जिसके पाँच प्रमुख शिखर हैं। इसलिए इसे "पाँच खजाने वाली बर्फ" (Five Treasures of Snow) के नाम से जाना जाता है। ये पाँच खजाने है: सोना, चांदी, रत्न, अन्न और पवित्र ग्रंथ।
कंचनजंगा हिमालय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी भौगोलिक स्थिति में पश्चिम में तमूर नदी, पूर्व में तीस्ता नदी, और उत्तर में ल्होनक नदी तथा जोंगसांग ला शामिल हैं। इस पर्वत का मुख्य शिखर भारत और नेपाल की सीमा पर है, जिसमें तीन मुख्य चोटियाँ भारत की सिक्किम सीमा में आती हैं जबकि शेष दो नेपाल में हैं।
कंचनजंगा न केवल ऊँचाई में महत्त्वपूर्ण है, बल्कि यह धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण पर्वत है। इसे स्थानीय लोग पवित्र मानते हैं और यह हिंदू और बौद्ध धर्म दोनों के लिए श्रद्धा स्थल है। यह क्षेत्र जैव विविधता से भरा हुआ है और पर्यटकों एवं पर्वतारोहियों के लिए आकर्षण का केन्द्र भी है।
कंचनजंगा की पहली सफल चढ़ाई 1955 में हुई थी तथा तब से यह पर्वत पर्वतारोहण का एक चुनौतीपूर्ण एवं प्रतिष्ठित स्थल बना हुआ है। इसके प्राकृतिक सौंदर्य, बर्फ से ढके शिखर, और घाटियाँ इसे एक अनूठा और विश्व प्रसिद्ध पर्वत बनाते हैं।
भारत की सबसे ऊँची चोटी कंचनजंगा अपनी ऊँचाई, प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक महत्व, और चुनौतीपूर्ण पर्वतारोहण के कारण अद्वितीय और सम्मानित है। यह हिमालय की एक महती धरोहर के रूप में स्थित है जो देश और विश्व के पर्वत प्रेमियों के लिए आकर्षक केंद्र है।
