भारत का सबसे ऊँचा बाँध - टिहरी बाँध

भारत का सबसे ऊँचा बाँध टिहरी बाँध (Tehri Dam) है जो उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में भागीरथी नदी पर स्थित है। इसका उद्घाटन 2006 में हुआ था और इसकी ऊँचाई लगभग 260.5 मीटर (855 फीट) है जो इसे भारत का सबसे ऊँचा तथा विश्व के सबसे ऊँचे बाँधों में से एक बनाता है। टिहरी बाँध के निर्माण से टिहरी झील का निर्माण हुआ जो जलविद्युत उत्पादन, सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

टिहरी बाँध

टिहरी बाँध एक बहुउद्देश्यीय बाँध है जिसका उपयोग 2400 मेगावाट विद्युत उत्पादन, 2,70,000 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई, तथा प्रतिदिन लगभग 102.20 करोड़ लीटर पेयजल आपूर्ति के लिए किया जाता है। इसकी लंबाई लगभग 575 मीटर और चौड़ाई 20 मीटर है। यह बाँध पृथ्वी और रॉक-फिल (मिट्टी और पत्थर से बना) है और केंद्र सरकार के 75% तथा राज्य सरकार के 25% वित्तीय योगदान से बना है।

इस परियोजना की शुरुआत 1961 में प्रारंभ हुई लेकिन निर्माण में आर्थिक, पर्यावरणीय और भूकंपीय क्षेत्रों में जोखिम के कारण देरी हुई। बाँध का क्षेत्र भूकंप संभावित है जिसमें 6.8 से 8.5 तीव्रता के भूकंप आ सकते हैं जो इसका एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय और सुरक्षा मुद्दा है। इसके बावजूद, टिहरी बाँध भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं और जल प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

टिहरी जलविद्युत परिसर (2400 मेगावाट) के तीन घटक हैं-
  • टिहरी बांध एवं जलविद्युत परियोजना (1000 मेगावाट)
  • कोटेश्वर बांध एवं जलविद्युत परियोजना (400 मेगावाट)
  • टिहरी पंप स्टोरेज प्लांट (1000 मेगावाट)
टिहरी बाँध एशिया का दूसरा और विश्व का आठवाँ सबसे ऊँचा बाँध भी माना जाता है। यह बाँध गंगा नदी के प्रमुख सहयोगी भागीरथी और भीलांगना नदियों के संगम पर स्थित है, इसलिए इसकी भौगोलिक और पर्यावरणीय महत्ता भी उच्च है।

टिहरी बाँध न केवल भारत का सबसे ऊँचा बाँध है बल्कि यह भारत की विद्युत उत्पादन क्षमता में भी सर्वोच्च स्थान रखता है तथा सिंचाई और जल आपूर्ति के क्षेत्र में भी इसका योगदान अमूल्य है। इसकी स्थापना से क्षेत्र की जीवनशैली और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण बदलाव आये हैं, हालांकि इसके निर्माण के दौरान विस्थापन और पर्यावरणीय चुनौतियों ने भी चर्चा प्राप्त की है। 

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