भारत को अपनी विशाल जैव-विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और व्यापक वन संपदा के लिए जाना जाता है। इन संसाधनों में सबसे महत्वपूर्ण है वन क्षेत्र, जो न केवल पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है बल्कि लाखों लोगों की आजीविका का आधार भी है। भारत में सबसे अधिक वन क्षेत्र वाला राज्य मध्य प्रदेश है जिसके पास कुल 77,522 वर्ग किलोमीटर का वन क्षेत्र है। यह आंकड़ा राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा दर्शाता है और देश के संपूर्ण वन क्षेत्र में इसका योगदान सबसे अधिक है।
मध्य प्रदेश का वन क्षेत्र: एक परिचय
मध्य प्रदेश को “टाइगर स्टेट” और “हार्ट ऑफ इंडिया” दोनों नामों से जाना जाता है। राज्य का विशाल भौगोलिक फैलाव, विविध जलवायु और ऊँचाई में परिवर्तन यहां घने जंगलों के निर्माण के लिए बेहद उपयुक्त है। यहां पाए जाने वाले वनों में साल, सागौन, बाँस, खैर, जामुन, बहेड़ा, हर्रा और कई तरह की औषधीय प्रजातियाँ शामिल हैं।
मुख्य वन प्रकार
मध्य प्रदेश के वन को मुख्यतः तीन श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:
- उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन: ये राज्य के बड़े हिस्से में पाए जाते हैं और सागौन तथा साल के लिए प्रसिद्ध हैं।
- उष्णकटिबंधीय कांटेदार वन: शुष्क क्षेत्रों में पाए जाने वाले इन वनों में बबूल, खैर व नीम प्रमुख हैं।
- नम पर्णपाती वन: पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में पाए जाने वाले इन वनों में जैव विविधता अधिक होती है।
जैव-विविधता और वन्य जीवन
मध्य प्रदेश जैव-विविधता से भरपूर है। यहां: कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, संजय गांधी जैसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान हैं। राज्य में 10 से अधिक राष्ट्रीय उद्यान, 25 से अधिक वन्यजीव अभयारण्य, और कई टाइगर रिज़र्व मौजूद हैं। राज्य में बाघ, तेंदुआ, बारहसिंहा, गौर, भालू, चिंकारा, हिरण, लोमड़ी सहित सैकड़ों स्तनधारी और पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। कान्हा टाइगर रिज़र्व बारहसिंहा संरक्षण कार्यक्रम के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
वन संसाधन और आर्थिक योगदान
मध्य प्रदेश का बड़ा हिस्सा वन उत्पादों पर आर्थिक रूप से निर्भर है।
- टीक (सागौन) उत्पादन में मध्य प्रदेश अग्रणी है।
- यहाँ से लाख, चिरौंजी, तेंदूपत्ता, औषधीय पौधे, गोंद, बाँस और कई गैर-काष्ठ वन उत्पाद (NTFP) प्राप्त होते हैं।
- तेंदूपत्ता उत्पादन के कारण राज्य बीड़ी उद्योग का महत्वपूर्ण केंद्र है।
वनों के कारण राज्य में इको-टूरिज्म भी तेजी से बढ़ रहा है जो स्थानीय समुदायों को रोजगार प्रदान करता है।
वन संरक्षण और प्रबंधन
मध्य प्रदेश सरकार वन संरक्षण के लिए कई प्रमुख योजनाओं पर कार्य कर रही है:
- जोहर परियोजना, हरियाली महोत्सव, वन महोत्सव,
- सामुदायिक वन प्रबंधन समितियाँ
- टाइगर रेंज देशों के सहयोग से संरक्षण कार्यक्रम
- मानव–वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपाय
इन योजनाओं का उद्देश्य वनों का विस्तार, जैव-विविधता संरक्षण और स्थानीय समुदायों की सहभागिता बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु:
- क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे अधिक वन क्षेत्र वाले शीर्ष तीन राज्य मध्यप्रदेश (77,073 वर्ग किमी.) हैं, जिसके बाद अरुणाचल प्रदेश (65,882 वर्ग किमी.) और छत्तीसगढ़ (55,812 वर्ग किमी.) हैं।
- कुल भौगोलिक क्षेत्र के संबंध में वनावरण के प्रतिशत की दृष्टि से, लक्षद्वीप (91.33%) में सबसे अधिक वनावरण है, जिसके बाद मिज़ोरम (85.34%) और अंडमान एवं निकोबार द्वीप (81.62%) का स्थान है।
- भारत में सबसे ज़्यादा जंगल मध्य प्रदेश राज्य में है।
- इंडियन स्टेट ऑफ़ फ़ॉरेस्ट रिपोर्ट 2019 से पता चलता है कि देश का कुल जंगल और पेड़ का कवर 80.73 मिलियन हेक्टेयर है, जो देश के ज्योग्राफ़िकल एरिया का 24.56 प्रतिशत है।
- कुल जंगल और पेड़ का कवर देश के कुल ज्योग्राफ़िकल एरिया का 24.56% है।
- देश का कुल जंगल का कवर 712,249 sq km है।
- भारत का कुल जंगल का कवर देश के कुल ज्योग्राफ़िकल एरिया का 21.67% है।
- मध्य प्रदेश में जंगल का कवर 77482.49 sq km है।
