बेलगाम विवाद के बारे में सामान्य जानकारी

बेलगाम विवाद के बारे में सामान्य जानकारी
बेलगाम (अब बेलगावी) विवाद भारत के दो राज्यों कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच दशकों से चला आ रहा एक भाषायी और प्रशासनिक विवाद है। यह मुद्दा मुख्यतः मराठी-भाषी आबादी, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, राज्य पुनर्गठन और सांस्कृतिक पहचान के प्रश्नों से जुड़ा हुआ है। आज भी यह विवाद दोनों राज्यों की राजनीति, समाज और सांस्कृतिक भावनाओं को प्रभावित करता है। विवाद की पृष्ठभूमि स्वतंत्रता के बाद भारत में राज्यों के सीमांकन का आधार मुख्यतः भाषा को बनाया गया। 1956 में राज्यों का पुनर्गठन अधिनियम लागू हुआ जिसके तहत बंबई राज्य (बाद में महाराष्ट्र) से बेलगाम और आस-पास के मराठीबहुल क्षेत्रों को कर्नाटक (तब मैसूर राज्य) में शामिल कर दिया गया। हालाँकि इन क्षेत्रों में मराठी भाषी लोगों की संख्या अधिक थी लेकिन प्रशासनिक, भौगोलिक और आर्थिक कारणों से इस क्षेत्र को मैसूर राज्य में रखा गया। बेलगाम पर महाराष्ट्र अपना दावा करता रहा है क्योंकि यहाँ मराठी भाषी लोगों की बड़ी आबादी रहती है लेकिन यह ज़िला कर्नाटक के अंतर्गत आता है। विवाद के मुख्य कारण भाषायी पहचान बेलगाम और उसके आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मराठी भाषी लोग रहते…