आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियाँ

आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियों का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से भारतीय राजनीति, प्रशासन और विकास योजनाओं का एक प्रमुख विषय रहा है। बिफरकशन के बाद बना यह राज्य अब अपनी प्रशासनिक संरचना को नए ढंग से संगठित करने की दिशा में प्रयासरत है। 2019 के बाद राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत “तीन राजधानी” मॉडल ने शासन, न्याय और विधायी प्रक्रियाओं को अलग-अलग शहरों में वितरित करने की अवधारणा को जन्म दिया। इस मॉडल का उद्देश्य राज्य के व्यापक और संतुलित विकास को प्रोत्साहन देना बताया गया है।

आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियाँ

तीन राजधानी मॉडल का प्रस्ताव

2014 में आंध्र प्रदेश का विभाजन हुआ और तेलंगाना अलग राज्य बना। इसके बाद आंध्र प्रदेश को एक नई राजधानी की आवश्यकता पड़ी। शुरुआती वर्षों में अमरावती को एकल राजधानी के रूप में विकसित करने की योजना बनी। लेकिन 2019 के बाद गठित नई सरकार ने तीन राजधानियाँ बनाने का प्रस्ताव रखा, जो इस प्रकार हैं:
  • विशाखापट्टनम – कार्यपालिका राजधानी (Executive Capital)
  • अमरावती – विधायी राजधानी (Legislative Capital)
  • कुरनूल – न्यायिक राजधानी (Judicial Capital)
यह प्रस्ताव “आंध्र प्रदेश डीसेंट्रलाइजेशन एंड इंक्लूसिव डेवलपमेंट ऑफ ऑल रीजन एक्ट, 2020” के तहत प्रस्तुत किया गया।

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